भोर तें साँझ लौ कानन ओर निहारति / घनानंद
From Hindi Literature
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रचनाकार: घनानंद | |
- सवैया
- सवैया
भोर तें साँझ लौ कानन ओर निहारति बावरी नेकु न हारति।
साँझ तें भोर लौं तारनि ताकिबो तारनि सों इकतार न टारति।
जौ कहूँ भावतो दीठि परै घनआनँद आँसुनि औसर गारति।
मोहन-सोहन जोहन की लगियै रहै आँखिन के उर आरति।। 6 ।।
