Fandom

Hindi Literature

मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक / माखनलाल चतुर्वेदी

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

कवि: माखनलाल चतुर्वेदी

~*~*~*~*~*~*~*~


मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक!

प्रलय-प्रणय की मधु-सीमा में

जी का विश्व वसा दो मालिक!


रागें हैं लाचारी मेरी,

तानें बान तुम्हारी मेरी,

इन रंगीन मृतक खंडों पर,

अमृत-रस ढुलका दो मालिक!

मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक!


जब मेरा अलगोजा बोले,

बल का मणिधर, स्र्ख रख डोले,

खोले श्याम-कुण्डली विष को

पथ-भूलना सिखा दो मालिक!

मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक!


प्रहर-प्रहर की लहर-लहर पर

तुम लालिमा जगा दो मालिक!

मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक!

Also on Fandom

Random Wiki