Fandom

Hindi Literature

माँ के आँचल को / रमा द्विवेदी

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































रचनाकारः रमा द्विवेदी

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~

मेरी साँसों की घड़ियां बिखरती रहीं।
फूल से पंखुरी जैसे झरती रही ॥

जन्म लेते ही माँ ने दुलारा बहुत,
अपनी ममता निछावर करती रही।
मेरी सांसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

वक़्त के हाथों में, मैं बड़ी हो गई,
माँ की चिन्ता की घड़ियां बढ़ती रहीं।
मेरी साँ सों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

ब्याह-कर मैं पति के घर आ गई,
माँ की ममता सिसकियां भरती रही।
मेरी साँसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

छोड़कर माँ को,दिल के दो टुकड़े हुए,
फिर भी जीवन का दस्तूर करती रही।
मेरी साँसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

वक़्त जाता रहा मैं तड़पती रही,
माँ के आंचल को मैं तो तरसती रही।
मेरी सांसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

एक दिन मैं भी बेटी की माँ बन गई,
अपनी ममता मैं उस पर लुटाती रही।
मेरी सांसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

देखते-देखते वह बड़ी हो गई,
ब्याह-कर दूर देश में बसती रही।
मेरी साँसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

टूटकर फिर से दिल के हैं टुकड़े हुए,
मेरी ममता भी पल-पल तरसती रही।
मेरी साँसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

वक़्त ढ़लता रहा, सपने मिटते रहे,
इक दिन माँ न रही, मैं सिसकती रही।
मेरी साँसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

सब कुछ मिला पर माँ न मिली,
माँ की छबि ले मैं दिल में सिहरती रही।
मेरी साँसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

फूल मुरझा के इक दिन जमीं पर गिरा,
मेरी साँसों की घड़ियां दफ़न हो रहीं।
मेरी साँसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

जीवन का नियम यूं ही चलता रहे,
ममता खोती रही और मिलती रही।
मेरी साँसों की घड़ियां बिखरती रहीं॥

Also on Fandom

Random Wiki