FANDOM

१२,२६२ Pages

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































साँचा:KKAnooditRachna

उम्र बढ़ती जा रही है माँ की मेरी

अब वह सवेरे देर से उठने लगी है

ताज़े अख़बारों की सरसराहट में भी

राहत उसे पहले से कम मिलने लगी है


हवा का हर घूँट उसे अब कड़वा लगता है

बर्फ़-सा सख़्त फ़र्श उसे अब चिकना लगता है

यहाँ तक कि कन्धे पर पड़ा हल्का शाल भी

उसे अब भारी लगे, ज्यों शरीर में चुभता है


जब माँ घूमती है बाहर, सड़क पर या गली में

हिमपात होता है इतना धीमा, सावधानी ही भली है

वर्षा जैसे चाटती है जूते उसके, किसी सनेही कुत्ते की तरह

हवा बहती है हौले से कि खड़ी रहे माँ कुकुरमुत्ते की तरह


इस महाकठिन, कष्टमय, मुसीबत भरे दौर में

वह सब कुछ करती रही आसानी के ठौर में

और मैं डरता रहा बहुत कि कहीं कोई उसे

पंख की तरह उड़ा न ले जाए इस रूस से


माँ के शेष बचे कुछ धुंधले चिन्हों के साथ

मैं भला तब कैसे जीवित रहूंगा, नाथ!

माँ है वो मेरी, आत्मा है, मेरी है प्रिया

उसके ही साए में मैं आज तक जिया

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on FANDOM

Random Wiki