मार देखो / केदारनाथ अग्रवाल
विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से
|
रचनाकार: केदारनाथ अग्रवाल | |
|
संग्रह का मुखपृष्ठ: फूल नहीं, रंग बोलते हैं-1 / केदारनाथ अग्रवाल |
मार देखो
मौन टूटेगा न घन से
वह पला है धैर्य बन के
इस हृदय में
- और तन में
साँस में
- मेरे नयन में ।
मार देखो
गीत टूटेगा न घन से
वह बना है प्राणपन से
दाह-दव में शुद्ध मन से
नेह के
- नाते वचन से ।
