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मीरा की विनती छै जी / मीराबाई

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रचनाकार: मीराबाई

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दरस म्हारे बेगि दीज्यो जी !
ओ जी! अन्तरजामी ओ राम ! खबर म्हारी बेगि लीज्यो जी
आप बिन मोहे कल ना पडत है जी !
ओजी! तडपत हूँ दिन रैन रैन में नीर ढले है जी
गुण तो प्रभुजी मों में एक नहीं छै जी !
ओ जी अवगुण भरे हैं अनेक, अवगुण म्हारां माफ करीज्यो जी
भगत बछल प्रभु बिड़द कहाये जी !
ओ जी! भगतन के प्रतिपाल, सहाय आज म्हांरी बेगि करीज्यो जी
दासी मीरा की विनती छै जी !
ओजी! आदि अन्त की ओ लाज , आज म्हारी राख लीज्यो जी!

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