मुरझाया फूल / महादेवी वर्मा
From Hindi Literature
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रचनाकार: महादेवी वर्मा | |
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संग्रह का मुखपृष्ठ: नीलाम्बरा / महादेवी वर्मा |
था कली के रूप शैशव-
में अहो सूखे सुमन,
मुस्कराता था, खिलाती
अंक में तुझको पवन !
खिल गया जब पूर्ण तू-
मंजुल सुकोमल पुष्पवर,
लुब्ध मधु के हेतु मँडराते
लगे आने भ्रमर !
स्निग्ध किरणें चन्द्र की-
तुझको हँसाती थीं सदा,
रात तुझ पर वारती थी
मोतियों की सम्पदा !
