Fandom

Hindi Literature

मो देखत जसुमति तेरैं ढोटा, अबहीं माटी खाई / सूरदास

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share
http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

राग रामकली


मो देखत जसुमति तेरैं ढोटा, अबहीं माटी खाई ।
यह सुनि कै रिस करि उठि धाई, बाहँ पकरि लै आई ॥
इक कर सौं भुज गहि गाढ़ैं करि, इक कर लीन्हीं साँटी ।
मारति हौं तोहि अबहिं कन्हैया, बेगि न उगिलै माटी ॥
ब्रज-लरिका सब तेरे आगैं, झूठी कहत बनाइ ।
मेरे कहैं नहीं तू मानति, दिखरावौं मुख बाइ ॥
अखिल ब्रह्मंड-खंड की महिमा, दिखराई मुख माँहि ।
सिंधु-सुमेर-नदी-बन-पर्वत चकित भई मन चाहि ॥
करतैं साँटि गिरत नहिं जानी, भुजा छाँड़ि अकुलानी ।
सूर कहै जसुमति मुख मूँदौ, बलि गई सारँगपानी ॥

भावार्थ :-- (किसी सखा ने कहा-) `यशोदाजी! तुम्हारे पुत्र ने मेरे देखते देखते अभी मिट्टी खायी है ।' यह सुनते ही माता क्रोध करके दौड़ पड़ी और बाँह पकड़कर श्याम को (घर) ले आयीं । एक हाथ से कसकर भुजा पकड़कर दूसरे हाथ में छड़ी ले ली (और डाँटकर बोलीं-) `कन्हैया! मैं अभी तुझे मारती हूँ, झटपट तू मिट्टी उगलता है या नहीं ?'(श्यामसुन्दर बोले-) `मैया ! व्रज के ये सभी बालक तेरे सम्मुख झूठी बात बनाकर कहते हैं । यदि तू मेरे कहने से नहीं मानती तो मुख खोलकर दिखला देता हूँ।' (यों कहकर) श्यामने मुखके भीतर ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का विस्तार दिखला दिया । समुद्र, सुमेरु आदि पर्वत,नदियाँ तथा वन (मुख में देखकर) माता अत्यधिक आश्चर्यमें पड़ गयी । हाथ से छड़ी कब गिर गयी, इसका उसे पता ही न लगा । श्याम का हाथ छोड़कर व्याकुल हो गयी । सूरदास जी कहते हैं कि यशोदा जी ने कहा--`मेरे शार्ङ्गपाणि ! अपना मुख बंद कर लो, मैं तुम पर बलिहारी जाती हूँ ।'

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on Fandom

Random Wiki