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यह जो महंत बैठे हैं / सैयद इंशा अल्ला खाँ 'इंशा'

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रचनाकार: सैयद इंशा अल्ला खाँ 'इंशा'

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यह जो महंत बैठे हैं राधा के कुण्ड पर ।

अवतार बन कर गिरते हैं परियों के झुण्ड पर ।।


शिव के गले से पार्वती जी लिपट गयीं,

क्या ही बहार आज है ब्रह्मा के रुण्ड पर ।


राजीजी एक जोगी के चेले पे ग़श हैं आप,

आशिक़ हुए हैं वाह अजब लुण्ड मुण्ड पर ।


'इंशा' ने सुन के क़िस्सा-ए-फरहाद यूँ कहा,

करता है इश्क़ चोट तो ऐसे ही मुण्ड पर ।

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