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राखी बांधत जसोदा मैया / सूरदास

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कवि: सूरदास


राखी बांधत जसोदा मैया ।

विविध सिंगार किये पटभूषण, पुनि पुनि लेत बलैया ॥

हाथन लीये थार मुदित मन, कुमकुम अक्षत मांझ धरैया।

तिलक करत आरती उतारत अति हरख हरख मन भैया ॥

बदन चूमि चुचकारत अतिहि भरि भरि धरे पकवान मिठैया ।

नाना भांत भोग आगे धर, कहत लेहु दोउ मैया॥

नरनारी सब आय मिली तहां निरखत नंद ललैया ।

सूरदास गिरिधर चिर जीयो गोकुल बजत बधैया ॥

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