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लौट आ, ओ धार / शमशेर बहादुर सिंह

विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से

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CHANDER


लौट आ ओ धार

टूट मत ओ साँझ के पत्थर

हृदय पर

(मैं समय की एक लम्बी आह

मौन लम्बी आह)

लौट आ, ओ फूल की पंखड़ी

फिर
फूल में लग जा

चूमता है धूल का फूल
कोई, हाय।