FANDOM

१२,२६२ Pages

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

वक्त कभी माटी का, वक्त कभी सोने का

पर न किसी हालत में यह अपना होने का ।


मिट्टी से बने महल, मिट्टी में मिले महल

खो गई खंडहरों में वैभव की चहल-पहल

बाजबहादुर राजा, रानी वह रूपमती

दोनों को अंक में समेट सो रही धरती


रटते हैं तोते इतिहास की छड़ी से डर

लेकिन यह सबक कभी याद नहीं होने का ।


सागर के तट बनते दम्भ के घरौंदे ये

ज्वार के थपेड़ों से टूट बिखर जाएंगे

टूटेगा नहीं मगर ये सिलसिला विचारों का

लहरों के गीत समय-शंख गुनगुनाएंगे


चलने पर संग चला सिर पर नभ का चंदा

थमने पर ठिठका है पाँव मिरगछौने का ।


बांध लिया शब्दों को मुट्ठी में दुनिया को

द्वार ही न मिला मुक्ति का जिसको मांगे से

सोने की ढाल और रत्न-जड़ी तलवारें

हारती रहीं कुम्हार के कर के धागे से


सीखा यों हमने फ़न सावन की बदली में

सावन के रंग और नूर को पिरोने का ।


बाजबहादुर-रूपमती=मांडू के राजा बाजबहादुर और रानी रूपमती की प्रसिद्ध प्रेमकथा की बात की गई है । कुम्हार के कर का धागा=कुम्हार चाक पर तैयार कच्चे बरतन को धागे से काटकर उतारता है ।


(रचनाकाल :27.10.1994)

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on FANDOM

Random Wiki