पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

विदा / अशोक वाजपेयी

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: अशोक वाजपेयी                 

तुम चले जाओगे

पर थोड़ा-सा यहाँ भी रह जाओगे

जैसे रह जाती है

पहली बारिश के बाद

हवा में धरती की सोंधी-सी गंध

भोर के उजास में

थोड़ा-सा चंद्रमा

खंडहर हो रहे मंदिर में

अनसुनी प्राचीन नूपुरों की झंकार|


तुम चले जाओगे

पर थोड़ी-सी हँसी

आँखों की थोड़ी-सी चमक

हाथ की बनी थोड़ी-सी कॉफी

यहीं रह जाएँगे

प्रेम के इस सुनसान में|


तुम चले जाओगे

पर मेरे पास

रह जाएगी

प्रार्थना की तरह पवित्र

और अदम्य

तुम्हारी उपस्थिति,

छंद की तरह गूँजता

तुम्हारे पास होने का अहसास|


तुम चले जाओगे

और थोड़ा-सा यहीं रह जाओगे|

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"विदा / अशोक वाजपेयी"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.