शब्द / अचल वाजपेयी
विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से
|
रचनाकार: अचल वाजपेयी | |
|
संग्रह का मुखपृष्ठ: शत्रु-शिविर तथा अन्य कविताएँ / अचल वाजपेयी |
हर शब्द
कहीं न कहीं
कुछ बोलता है
वह कभी आग
कभी काला धुआँ
कभी धुएँ का
अहसास होता है
आओ, इस शब्द को
जलती आग-सा जिएँ
