संगमरमर का सबेरा और हम / केदारनाथ अग्रवाल
विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से
|
रचनाकार: केदारनाथ अग्रवाल | |
|
संग्रह का मुखपृष्ठ: फूल नहीं, रंग बोलते हैं-1 / केदारनाथ अग्रवाल |
संगमरमर का सवेरा !
और
- उसकी मूर्तियाँ हम--
मूक, कातर !
आह ! हमको
शस्यश्यामा छुए,
चूमें और भेंटे !!
