पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

सपने जगाती आ!/ महादेवी वर्मा

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: महादेवी वर्मा                 

 संग्रह का मुखपृष्ठ: दीपशिखा / महादेवी वर्मा


श्याम अंचल,

स्नेह-उर्म्मिल,

तारकों से चित्र-उज्ज्वल,

घिर घटा-सी चाप से पुलकें उठाती आ!

हर पल खिलाती आ!

सजल लोचन,

तरल चितवन,

सरल भ्रू पर विरल श्रम-कण,

तृषित भू को क्षीर-फेनिल स्मित पिलाती आ!

कण-तृण जिलाती आ!

शूल सहते,

फूल रहते;

मौन में निज हार कहते,

अश्रु-अक्षर में पता जय का बताती आ!

हँसना सिखाती आ!

विकल नभ उर,

घूलि-जर्जर

कर गये हैं दिवस के शर,

स्निग्ध छाया से सभी छाले धुलाती आ!

क्रन्दन सुलाती आ!

लय लुटी है,

गति मिटी है,

हाट किरणों की बटी है,

धीर पग से अमर क्रम-गाथा सुनाती आ!

भूलें भुलाती आ!

व्योम में खग,

पंथ में पग,

उलझनों में खो चला जग,

लघु निलय में नींद के सबको मिलाती आ!

दूरी मिटाती आ!

कर व्यथायें,

सुख-कथायें,

तोड़ सीमा की प्रथायें,

प्रात के अभिषेक को हर दृग सजाती आ!

उर-उर बसाती आ!

सपने जगाती आ!

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"सपने जगाती आ!/ महादेवी वर्मा"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.