साँसों की परिधि / दुष्यन्त कुमार
From Hindi Literature
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रचनाकार: दुष्यन्त कुमार | |
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संग्रह का मुखपृष्ठ: आवाज़ों के घेरे / दुष्यन्त कुमार |
जैसे अन्धकार में
एक दीपक की लौ
और उसके वृत्त में करवट बदलता-सा
पीला अँधेरा।
वैसे ही
तुम्हारी गोल बाँहों के दायरे में
मुस्करा उठता है
दुनिया में सबसे उदास जीवन मेरा।
अक्सर सोचा करता हूँ
इतनी ही क्यों न हुई
आयु की परिधि और साँसों का घेरा।
