साये में धूप / दुष्यन्त कुमार
From Hindi Literature
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रचनाकार: दुष्यंत कुमार | |
| साये में धूप | |
| रचनाकार: | दुष्यंत कुमार |
| प्रकाशक: | -- |
| वर्ष: | -- |
| भाषा: | हिन्दी |
| विषय: | कविताएँ |
| शैली: | -- |
| पृष्ठ संख्या: | -- |
| ISBN: | -- |
| विविध: | -- |
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- कहाँ तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए / दुष्यंत कुमार
- कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं / दुष्यंत कुमार
- ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ होगा / दुष्यंत कुमार
- इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है / दुष्यंत कुमार
- देख, दहलीज़ से काई नहीं जाने वाली / दुष्यंत कुमार
- खँडहर बचे हुए हैं, इमारत नहीं रही / दुष्यंत कुमार
- परिन्दे अब भी पर तोले हुए हैं / दुष्यंत कुमार
- अपाहिज व्यथा को वहन कर रहा हूँ / दुष्यंत कुमार
- भूख है तो सब्र कर / दुष्यंत कुमार
