सुबह के लिए / कुमार अंबुज
From Hindi Literature
|
रचनाकार: कुमार अंबुज | |
|
संग्रह का मुखपृष्ठ: किवाड़ / कुमार अंबुज |
सुबह के लिए
चौका-बर्तन के बाद
माँ ने ढँक दिये हैं कुछ अंगारे
राख से
थोड़ी-सी आग
कल सुबह के लिए भी तो
चाहिए !
(1988)
|
रचनाकार: कुमार अंबुज | |
|
संग्रह का मुखपृष्ठ: किवाड़ / कुमार अंबुज |
सुबह के लिए
चौका-बर्तन के बाद
माँ ने ढँक दिये हैं कुछ अंगारे
राख से
थोड़ी-सी आग
कल सुबह के लिए भी तो
चाहिए !
(1988)