पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

सूरज का सफ़र ख़त्म हुआ रात न आयी / शहरयार

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: शहरयार                 

सूरज का सफ़र ख़त्म हुआ रात न आयी
हिस्से में मेरे ख्वाबों की सौगत न आयी

मौसम ही पे हम करते रहे तब्सरा ता देर
दिल जिस से दुखे ऐसी कोई बात न आयी

यूं डोरे को हम वक्त की पकड़े तो हुए थे
एक बार मगर छूटी तो फिर हाथ न आयी

हमराह कोई और न आया तो क्या गिला
परछाई भी जब मेरी मेरे साथ न आयी

हर सिम्त नज़र आती हैं बेफ़सल ज़मीन
इस साल भी शहर में बरसात न आयी

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"सूरज का सफ़र ख़त्म हुआ रात न आयी / शहरयार"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.