सृजन का दर्द / कन्हैयालाल नंदन
From Hindi Literature
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रचनाकार: कन्हैयालाल नंदन | |
अजब सी छटपटाहट,
घुटन,कसकन ,है असह पीङा
समझ लो
साधना की अवधि पूरी है
अरे घबरा न मन
चुपचाप सहता जा
सृजन में दर्द का होना जरूरी है
