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सोजे-ग़म देके उसने ये इरशाद किया / जोश मलीहाबादी

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रचनाकार: जोश मलीहाबादी

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सोजे-ग़म देके उसने ये इरशाद किया ।

जा तुझे कश्मकशे-दहर से आज़ाद किया ।।


वो करें भी तो किन अल्फ़ाज में तिरा शिकवा,

जिनको तिरी निगाहे-लुत्फ़ ने बर्बाद किया ।


दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया,

जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया ।


इसका रोना नहीं क्यों तुमने किया दिल बरबाद,

इसका ग़म है कि बहुत देर में बरबाद किया ।


मुझको तो होश नहीं तुमको ख़बर हो शायद,

लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बरबाद किया ।

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