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सोनिया समन्दर / नागार्जुन

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रचनाकार: नागार्जुन

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~


सोनिया समन्दर

सामने

लहराता है

जहाँ तक नज़र जाती है,

सोनिया समन्दर !


बिछा है मैदान में

सोन ही सोना

सोना ही सोना

सोना ही सोना


गेहूँ की पकी फसलें तैयार हैं--

बुला रही हैं

खेतिहरों को

..."ले चलो हमें

खलिहान में--

घर की लक्ष्मी के

हवाले करो

ले चलो यहाँ से"


बुला रही हैं

गेहूँ की तैयार फसलें

अपने-अपने कॄषकों को...


1983 में रचित

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