सौ गुलाब खिले / गुलाब खंडेलवाल
From Hindi Literature
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रचनाकार: गुलाब खंडेलवाल | |
| सौ गुलाब खिले | |
| रचनाकार: | गुलाब खंडेलवाल |
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| भाषा: | हिन्दी |
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- कुछ हम भी लिख गये हैं तुम्हारी किताब में / गुलाब खंडेलवाल
- आज तो पूनो मचल पड़ी / गुलाब खंडेलवाल
- विदा करने निकली जब माता / गुलाब खंडेलवाल
- खिली गुलाब की दुनिया तो है सभी के लिए / गुलाब खंडेलवाल
- उन्हीं की राह में मरना कहीं होता तो क्या होता / गुलाब खंडेलवाल
- पहले तो मेरे दर्द को अपना बनाइए / गुलाब खंडेलवाल
- कभी सिर झुका के चले गये / गुलाब खंडेलवाल
- फिर उन्हें हम पुकार बैठे हैं / गुलाब खंडेलवाल
