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हम हैं कुछ अपने लिए कुछ हैं ज़माने के लिए / निदा फ़ाज़ली

From Hindi Literature

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 रचनाकार: निदा फ़ाज़ली                 

 संग्रह का मुखपृष्ठ: मौसम आते जाते हैं / निदा फ़ाज़ली

हम हैं कुछ अपने लिए कुछ हैं ज़माने के लिए
घर से बाहर की फ़ज़ा हँसने-हँसाने के लिए

यूँ लुटाते न फिरो मोतियों वाले मौसम
ये नगीने तो हैं रातों को सजाने के लिए

अब जहाँ भी हैं वहीं तक लिखो रूदाद-ए-सफ़र
हम तो निकले थे कहीं और ही जाने के लिए

मेज़ पर ताश के पत्तों-सी सजी है दुनिया
कोई खोने के लिए है कोई पाने के लिए

तुमसे छुट कर भी तुम्हें भूलना आसान न था
तुमको ही याद किया तुमको भुलाने के लिए

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