पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

हर्फ़े-ताज़ा की तरह क़िस्स-ए-पारीना / फ़राज़

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: अहमद फ़राज़                 

 संग्रह का मुखपृष्ठ: खानाबदोश / फ़राज़

हर्फ़े-ताज़ा की तरह क़िस्स-ए-पारीना कहूँ
कल की तारीख़ को मैं आज का आईना कहूँ

चश्मे-साफ़ी से छलकती है मये-जाँ तलबी
सब इसे ज़हर कहें मैं इसे नौशीना कहूँ

मैं कहूँ जुरअते-इज़हार हुसैनीय्यत है
मेरे यारों का ये कहना है कि ये भी न कहूँ

मैं तो जन्नत को भी जानाँ का शबिस्ताँ जानूँ
मैं तो दोज़ख़ को भी आतिशकद-ए-सीना कहूँ

ऐ ग़मे-इश्क़ सलामत तेरी साबितक़दमी
ऐ ग़मे-यार तुझे हमदमे-दैरीना कहूँ

इश्क़ की राह में जो कोहे-गराँ आता है
लोग दीवार कहें मैं तो उसे ज़ीना कहूँ

सब जिसे ताज़ा मुहब्बत का नशा कहते हैं
मैं ‘फ़राज़’ उस को ख़ुमारे-मये-दोशीना कहूँ

क़िस्स-ए-पारीना = गुज़रा हुआ, पुराना क़िस्सा
नौशीना = शर्बत
शबिस्ताँ = शयनागार
आतिशकद-ए-सीना = सीना या छाती की भट्ठी
हमदमे-दैरीना = पुराना मित्र
कोहे-गराँ = मुश्किल पहाड़
ख़ुमारे-मये-दोशीना = ग़ुजरी रात की शराब का ख़ुमार

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"हर्फ़े-ताज़ा की तरह क़िस्स-ए-पारीना / फ़राज़"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.