पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

हर बेज़बाँ को शोलानवा कह लिया करो / क़तील

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: क़तील शिफ़ाई                 

हर बेज़बाँ को शोलानवा कह लिया करो
यारो सुकूत ही को सदा कह लिया करो

ख़ुद को फ़रेब दो कि न हो तल्ख़ ज़िन्दगी
हर सन्ग्दिल को जाने-ए-वफ़ा कह लिया करो

गर चाहते हो ख़ुश रहें कुछ बन्दगान-ए-ख़ास
जितने सनम हैं उन को ख़ुदा कह लिया करो

इन्सान का अगर क़द-ओ-क़ामत न बढ़ सके
तुम इस को नुक़्स-ए-आब-ओ-हवा कह लिया करो

अपने लिये अब एक ही राह-ए-निजात है
हर ज़ुल्म को रज़ा-ए-ख़ुदा कह लिया करो

ले दे के अब यही है निशान-ए-ज़िया "क़तील"
जब दिल जले तो उस को दिया कह लिया करो

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"हर बेज़बाँ को शोलानवा कह लिया करो / क़तील"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.