Fandom

Hindi Literature

हुस्न-ए-माह गरचे बाहन्गाम-ए-कमाल अच्छा है / ग़ालिब

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

लेखक: ग़ालिब

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*

हुस्न-ए-मह गरचे बहंगाम-ए-कमाल अच्छा है
उस से मेरा मह-ए-ख़ुर्शीद-ए-जमाल अच्छा है

बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहजा निगाह
जी में कहते हैं मुफ़्त आये तो माल अच्छा है

और बाज़ार से ले आयें अगर टूट गया
साग़र-ए-जम से मेरा जाम-ए-सिफ़ाल अच्छा है

बेतलब दें तो मज़ा उसमें सिवा मिलता है
वो गदा जिसको न हो ख़ू-ए-सवाल अच्छा है

उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

देखिये पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है

हमसुख़न तेशे ने फ़रहाद को शीरीं से किया
जिस तरह का भी किसी में हो कमाल अच्छा है

क़तरा दरिया में जो मिल जाये तो दरिया हो जाये
काम अच्छा है वो जिसका कि म'आल अच्छा है

ख़िज्र सुलतां को रखे ख़ालिक़-ए-अक्बर सरसब्ज़
शाह के बाग़ में ये ताज़ा निहाल अच्छा है

हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को "ग़ालिब" ये ख़याल अच्छा है

Also on Fandom

Random Wiki