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  • Sambandhsetu

    समसामयिक दोहे -27.03.2014

    मार्च २८, २०१४ by Sambandhsetu



    करन बहादुर (संपादक-सम्बन्धसेतु) +919717617357

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  • Sudheermaurya

    वो हिन्दू थे।


    उन्होंने विपत्ति को

    आभूषण की तरह

    धारण किया

    उनके ही घरों में आये

    लोगों ने

    उन्हें काफ़िर कहा

    क्योंकि

    वो हिन्दू थे।


    उन्होंने

    यूनान से आये घोड़ो का

    अभिमान

    चूर - चूर

    कर दिया

    सभ्यता ने

    जिनकी वजह से

    संसार में जन्म लिया

    वो हिन्दू थे।


    जिन्होंने

    तराइन के मैदान में

    हंस - हंस के

    हारे हुए

    दुश्मनों को

    जीवन दिया

    वो हिन्दू थे।


    जिनके मंदिर

    आये हुए लुटेरो ने

    तोड़ दिए

    जिनकी फूल जैसी

    कुमारियों को

    जबरन अगुआ करके

    हरम में रखा गया

    जिन पर

    उनके ही घर में

    उनकी ही भगवान्

    की पूजा पर

    जजिया लगया गया

    वो हिन्दू थे।


    हा वो

    हिन्दू थे

    जो हल्दी घाटी में

    देश की आन

    के लिए

    अपना रक्त

    बहाते रहे

    जिनके बच्चे

    घास की रोटी

    खा कर

    खुश रहे

    क्योंकि

    वो हिन्दू थे।


    हाँ वो हिन्दू हैं

    इसलिए

    उनकी लडकियों की

    अस्मत का

    कोई मोल नहीं

    आज भी

    वो अपनी ज़मीन

    पर ही रहते हैं

    पर अब

    उस ज़मीन का

    नाम पकिस्तान है।


    अब उनकी

    मातृभूमि का नाम

    पाकिस्तान है

    इसलिए

    अब उन्…









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  • Sudheermaurya
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  • Sudheermaurya

    पीड़ा...

    वो बिस्तर पर बार-बार करवटें लेती है, सोने का प्रयत्न करती है किन्तु असफल होती है। उसकी आंखों में नींद नहीं है, नींद की जगह तो उसके चेहरे ने ले ली है, खुली आंखों से वो उसके ख्वाब देख रही है, आंखे बन्द करती है तो लगता है बिस्तर पे वो अकेली नहीं साथ में वो भी लेटा है, उसके बदन को सहलाते हुए और वो उसकी बाहों में पिघलती जा रही है। वो झट से आंखे खोल देती है, इधर-उधर नीम अंधेरे में नजर गड़ाती है, वो दिखाई नहीं देता है।

    उसी का सहपाठी है, विदेश एम.ए. हिन्दी साहित्य, दोनों के सेम सबजेक्ट, सेम सेक्शन। पूरी यूनिवर्सटी में उसकी शायरी और कविता के चर्चे हैं, तमाम लड़कियां उस पर मरती है। पर वो उस पर मरता है। हां वो दोनों दोस्त है, पर वो उससे दोस्ती से कुछ ज्यादा मांगता है। आज उसकी किताब में, एक पर्ची मिली थी, कुछ पक्तियां लिखी थी शायद कविता थी- सीम…

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  • Kavi Deepak Sharma


    समाज की दुर्दशा और आवाम खामोश ..बड़ी हैरत की बात है ..लेकिन ये सब मुमकिन है ,यहाँ सब कुछ हो सकता है .ये हिंदुस्तान है मेरे भाई. सब्जीवाला अगर एक आलू कम तौल दे तो सब्जी काटने वाले चाक़ू से ही उसका क़त्ल हो जाता है और उसके परिवार वालों को चोर खानदान कह दिया जाता है. गली से घर वालों का निकलना मुश्किल हो जाता है. हर चलता फिरता ताने और तंज़ कसता जाता है. मानो इस आदमी में समाज का बेडा गर्क कर दिया और देश को इससे अपूर्णीय क्षति हुई है....दो आलू किसी का घर बर्बाद करने के लिए काफी हैं और क़त्ल करने वाला बहुत गर्व से ,सीना चौड़ा कर कहता है ...मैं असत्य बर्दाश्त नहीं कर सकता ...समाज में चोर नहीं पैदा होने चाहिए ....मैंने जिंदगी में कभी कोई भी गलत काम नहीं क्या और गलत देख कर मेरा खून खौल उठता है..मुझे अपने किये पर कोई अफ़सोस नहीं है...(शायद एक नेता…

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  • Kavi Deepak Sharma

    Aurat...........Meri Ek Ghazal" Deepak Sharma"

    अप्रैल २८, २०१२ by Kavi Deepak Sharma

    उमर के साथ साथ किरदार बदलता रहा शख्सियत औरत ही रही , प्यार बदलता रहा .

    बेटी ,बहिन ,बीबी , माँ , ना जाने क्या क्या चेहरा औरत का दहर हर बार बदलता रहा .

    हालात ख्वादिनों के न सदी कोई बदल पाई बस सदियाँ गुज़रती रहीं ,संसार बदलता रहा .

    प्यार ,चाहत ,इश्क ,राहत ,माशूक और हयात मायने एक ही रहे ,मर्द बस बात बदलता रहा .

    किसी का बार कोई इंसान नहीं उठा सकता यहाँ पर कोंख में जिस्म पलकर आकार बदलता रहा .

    सियासत ,बज़ारत,तिज़ारत या फिर कभी हुकूमत औरत बिकती रही चुपचाप , बाज़ार बदलता रहा .

    कब तलक बातों से दिल बहलाओगे "दीपक ”तुम भी करार कोई दे ना सका बस करार बदलता रहा

    -- http://www.kavideepaksharma.com

    Umar ke saath saath kirdaar badaldta raha Shakhsiyat Aurat hi rahi, pyaar bada…

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  • गुरूवर

    फसक

    मार्च ३०, २०१२ by गुरूवर

    आज य चलन खराब हैगो, सबुहें आगिल शराब हैगो। हटृट-कटृट मैस ठाड़-ठाड़े न्‍हैगो, यो जमाने कें जाणि को खैगो।

    मै लै कूणूँ तुम लै काओं, ज्‍यै लै खाछा जरा देखि भेर खाओ। तु क्‍यै सोचणा छा बड़ काम हैगो, जैं कैं तुमूल ठाड़ करो उ आज भै गो।

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  • डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

    दुनिया में रह के दुनिया से अंजान रह गया।

    अपने ही घर में बनके मैं मेहमान रह गया॥


    इंसानियत ही बन गया मज़हब फ़क़त मेरा,

    हिन्दू न मैं रहा न मुसलमान रह गया॥


    जितने भी थे ग़रीब वो मुंह ढक के सो गए,

    बस रात भर वो जागता धनवान रह गया॥


    नफ़रत फ़रेब-ओ-झूँठ के बनते रहे क़िले,

    मज़हब रहा न दीन न ईमान रह गया॥


    मंज़िल यही थी तेरी तू अब तक कहाँ रहा?

    ये बात सबसे पूँछता शमशान रह गया॥


    कहती थी जिस मसीहा को दुनिया कभी ख़ुदा,

    सबके नज़र में बनके वो शैतान रह गया॥


    बल्बों की रौशनी में भी खिलने लगे कंवल,

    “सूरज” तमाशा देख के हैरान रह गया॥


    डॉ. सूर्या बाली “सूरज”

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  • डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

    उड़ने लगे गुलाल तो समझो होली है। फागुन करे धमाल तो समझो होली है॥

    काले गोरे में कोई भेद न रह जाये, सतरंगी हो हाल तो समझो होली है॥

    बजने लगे मृदंग ढ़ोल जब नाचे सब, देकर के करताल तो समझो होली है॥

    मौसम के संग भांग अगर सर चढ़ जाये, सम्हले न जब चाल तो समझो होली है॥

    चलते फिरते राह कोई अंजाना भी, तुझपे दे रंग डाल तो समझो होली है॥

    दुश्मन को भी गले लगा ले जब बढ़के, दिल के मिटें मलाल तो समझो होली है॥

    रंगों की बौछार अबीरों के छींटे, तन मन कर दें लाल तो समझो होली है॥

    मन के गहरे सागर में जब भी लहरें, लेने लगें उछाल तो समझो होली है॥

    हर नुक्कड़ चौराहे पे जब पी करके, बुड्ढे करें बवाल तो समझो होली है॥

    नफ़रत मिटे मोहब्बत फैले जब “सूरज” दुनिया हो खुशहाल तो समझो होली है॥

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  • Rajkumar soni

    rajkumar soni

    अक्तूबर २८, २०११ by Rajkumar soni

    जानलेवा लौकी-करेला जूस

    - राजकुमार सोनी अगर आप लौकी या करेले का जूस पी रहे हैं तो सावधान हो जाएं, हो सकता है यह आपकी जान भी ले ले। दिल्ली में एक चिकित्सक और एक वैज्ञानिक की हाल ही में हुई मौत एवं स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी से यह स्पष्ट हो गया है कि जूस अब जानलेवा साबित हो रहा है।

    क्या लौकी और करेले का मिक्स जूस जहरीला हो सकता है? दिल्ली की एक घटना ने ऐसे सवाल खड़े करने पर मजबूर कर दिया है। दिल्ली में एक वैज्ञानिक की मौत लौकी और करेले का मिक्स जूस पीने के बाद हो गई। योग गुरु बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने लोगों को सलाह दी है कि वो कड़वी लौकी का जूस ना पिएं।

    अगर आप लौकी का जूस पीते हैं तो जरा संभल जाइए। लौकी का जूस हो सकता है खतरनाक। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में एडवाइजरी जारी की है। अपनी बेहतर सेहत के लिए अगर आप लौकी क…

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  • डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

    दिल से नफ़रत को हटाकर देखो।

    थाल पूजा के सजाकर देखो॥


    आ गई नूर भरी दिवाली,

    दीप खुशियों के जलाकर देखो॥


    जश्न है, शोर है पटाखों का,

    फूलझड़ियों को छुड़ाकर देखो॥


    खूबसूरत लगेगी ये दुनिया,

    तीरगी दिल की मिटाकर देखो॥


    दो कदम बढ़ के भरो बाहों मे,

    ज़िद की दीवार गिराकर देखो॥


    साथ था कारवां कभी मेरे,

    अब मैं तन्हा हूँ ये आकर देखो॥


    फूल ही फूल नज़र आएंगे,

    राह से खार हटाकर देखो॥


    दिल को आराम मिलेगा तेरे,

    रोते बच्चे को हँसाकर देखो॥


    होके मदहोश सभी झूमेंगे,

    जाम नज़रों से पिलाकर देखो॥


    ये जहां साथ गुनगुनाएगा,

    तुम ग़ज़ल मेरी तो गाकर देखो॥


    दौड़ा “सूरज” भी चला आएगा,

    दिल से इकबार बुलाकर देखो॥


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  • Shiv gurudev

    chhand

    अप्रैल २२, २०११ by Shiv gurudev

    radha jaisi chhori tumko bhi mil jaygi, pahle shyam sanwre si rachna rachaiye. gopion ke man ke jo taar jhankar de, aisi pahle pyari pyari bansuri bajaiye. pyar bhi jaroori dildar bhi jaroori, par sath sath ek aur dharm bhi nibhaiye. jisse yeh aan baan shaan aur maan yar, pahle us bharti ke bhal ko bachaiye.

    9628300950

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  • Dr ranjan vishada

    on valentine day

    फ़रवरी १४, २०११ by Dr ranjan vishada

    pyar ka nam sabne suna hai magar, pyar ke sar se sab hi anjan hai. bhawnao se yeh khelta kis tarah, sonch kar log hote pareshan hai.

    phootta pyar ka jab bhi ankur kabhi, dharkano me khanak khud va khud jagti. deti hai meethi meeyhi chubhan preet ki- chasani aise teere nazar pagti.

    ham ko bhi unme hi aik samjho ki jo, aise dardo ki daulat se dhanwan hai.

    gum uthane me jo log peeche rahe, meri nazaro ko vo deekhe nadan se. pyar ke jo samundar me utre hai vo, hai na ghav rae andhi aur toophan se,

    gum pe mere na aphsos karna kabhi. gum hamare liye khas mehman hai. pyar ki lahro me jab se utra hu mai, cha gaya mujhpe kush aisa deewanapan, ab satati nahi kabhi bhi mujhe, garmio ki tapan sardio ki galan. lagta hai …

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  • Shishirmit

    'एक काव्य मोती' वीर रस के सिद्ध राजस्थानी कवि श्री श्यामनारायण पाण्डेय के प्रसिद्ध खंडकाव्य 'जय हनुमान' से 'एक काव्य मोती'

    ज्वलल्ललाट पर अदम्य तेज वर्तमान था

    प्रचंड मान-भंग-जन्य क्रोध वर्धमान था

    ज्वलंत पुच्छ-बाहु व्योम में उछालते हुए

    अराति पर असह्य अग्नि-दृष्टि डालते हुए

    उठे कि दिग-दिगंत में अवर्ण्य ज्योति छा गयी

    कपीश के शरीर में प्रभा स्वयं समा गयी.

    - श्यामनारायण पाण्डेय (जय हनुमान)

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  • Shashwat shekher tiwari

    meri jaan

    फ़रवरी १८, २०१० by Shashwat shekher tiwari

    Aksar teri yaad me jo boonde char bah jati hai, wo aansu hai mere,btane ko ye baat har bar rah jati hai...

    tu hole se muskurakar ,anayas hi sharma jati hai, ye teri muskurahat hi hai ,jo aaj bhi mujhe hansati hai...Aksar teri yaad...

    kabhi dekha tujhe khwabo me ,ab har rat tu aati hai, dekh tadapta hai ye dil bhi ab ,jis rat tu nhi aati hai...Aksar teri yaad...

    taysuda waqt par ab ye sanse bhi aana bhool jati hai, inka to koi wada nhi ,par tu kyo itna bhool jati hai...Aksar teri yaad...

    is jism ko bhi jlaya ,aur kuchh had tak khak kar diya hamne, par mout bhi jiddi hai ,ya tujhse door hoo isliye nhi aati hai...Aksar teri yaad...

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  • Shashwat shekher tiwari

    kaas muje phir pyar ho jaye......

    फ़रवरी १८, २०१० by Shashwat shekher tiwari

    काश मुझे फिर से प्यार हो जाए………. टूट चुका है दिल है और बिखर चुके हैं हम ख़ुशियाँ अब भी बहुत,आँखें फिर भी नम इस नमी पर किसी की मुहब्बत कारगार हो जाए खुदा करे, काश मुझे फिर से प्यार हो जाए....

    ज़िंदगी का मामूली सा फ़लसफ़ा सम्झ हमें अब आता नही आँखों की रोशनी वही पर जाने क्यू कुछ भाता नही आ जाए नज़रों में वो ही बात गर ये आँखें चार हो जाए खुदा करे, काश मुझे फिर से प्यार हो जाए....

    कहा करते थे कभी हम कि इश्क़ बिना जज़्बात नही हँसते तो अब भी हैं पर हँसी में अब वो बात नही किसी हसीन की मुस्कुराहत मेरी हँसी का सार हो जाए खुदा करे, काश मुझे फिर से प्यार हो जाए....

    दिन गुज़र रहे हैं और उसकी याद जा चुकी है पर जैसे वक़्त थाम गया है और ज़िंदगी रुकी है किसी की चाहत मेरी ज़िंदगी की रफ़्तार हो जाए खुदा करे, काश मुझे फिर से प्यार हो जाए...

    हासिल चाहे यारो सब कुछ…

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  • Shashwat shekher tiwari

    nakam mohobat

    फ़रवरी १८, २०१० by Shashwat shekher tiwari

    samandar ki ret m ghar mile na male. fir ye zindgi duniya me mile na mile . karte hai yaad aapko dil se itna . kya pata ye dil dhadhkta hua kal mile na mile .

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  • Alok shukla

    man bada aahat hai

    जनवरी १५, २०१० by Alok shukla

    Ye ajib si roshni ke jugnuon ki jagmagahat, hai chamak, bahut gar zindagi mein ujalon ki naa koi aahat hai.. Ye ajib si tutan liye Aasthaon ka chal raha sangharsh hai, gairon mein nafasat to apnon mein apnape ki chaahat hai, chal raha hai safar, raste ho rahe hain tay ye malum nahi, gar kuch naa kuch kaam kar rahe hain,bas itni si rahat hai, Bas ye ki humne umra lagayi jinhe apna banane mein, unhe Vakt na laga hume khariz karne main,man bada aahat hai, From my poems blog ( alokshukla.blog.co.in)

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  • Alok shukla

    tum ghar kab aaoge ?

    जनवरी १५, २०१० by Alok shukla

    ghar ke samane madhosh pada, wo aadami bhi ghar chala gaya, tum ghar kab aaoge, maa roz ki tarah aaj bhi do rotia bachayegi, tum ghar kab aaoge, din apne paro ko samet kar chala gaya, ab chand aayega, tum ghar kab aaoge, kuch kaam adhure ab bhi hai, ke pani tapak raha hai chappar se waise hi, jo paise tumne bheje ussne na ab pura padta hai, aur baniya roz tagade karne ko aata hai, tum ghar kab aaoge, suno, ab maa shyad na kar paye zyada intzaar, ke roz khasti hai wo kal se zyada, ab ghar aa hi jaao……

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  • Alok shukla

    anjaam

    नवंबर १३, २००९ by Alok shukla

    Main chala mere saath mere fasane rahe, guzare lamho ke machalate bahane rahe, har kadam safar ka kuch yu raha anjam, pahuchana tha manzil raste par pade rahe, milne ki basbari kuch iss kadar thi unse, ke subah tha jagna raat bhar jagte rahe, na kaam se ashiki ki na isq ko kaam samjha, iss sab main na idhar ke rahe na udhar ke rahe, koi uske dil se toh puchen a mere dost, aana tha karib toh door door kyo chalte rahe, 2009/Alok shukla

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  • Alok shukla

    kuch aisa....jo bas ban gaya

    अक्तूबर २०, २००९ by Alok shukla

    1- gairo se ek wajib si doori rakhi jay dosto se bhi ek faasle se mila jay zamana ab apne jaise nahi raha dost har kaam badi soch samajh ke kiya jay 2- kabhi zara si baat par bikhar jata hu kabhi hazar zakhm yu hi sah jata hu kaisa ye dil hai nahi samajh pata hu gar dekhu toh har insa ko aisa hi pata 3- wo vakt ki tarah guzar gaya wo lamha mere paas tha ki bichhud gaya bichhudane ka gam nahi ,gam hai to iska ki wo lamha mera apna tha mujhase door kyo kar chala gaya.

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