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  • डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

    दुनिया में रह के दुनिया से अंजान रह गया।

    अपने ही घर में बनके मैं मेहमान रह गया॥


    इंसानियत ही बन गया मज़हब फ़क़त मेरा,

    हिन्दू न मैं रहा न मुसलमान रह गया॥


    जितने भी थे ग़रीब वो मुंह ढक के सो गए,

    बस रात भर वो जागता धनवान रह गया॥


    नफ़रत फ़रेब-ओ-झूँठ के बनते रहे क़िले,

    मज़हब रहा न दीन न ईमान रह गया॥


    मंज़िल यही थी तेरी तू अब तक कहाँ रहा?

    ये बात सबसे पूँछता शमशान रह गया॥


    कहती थी जिस मसीहा को दुनिया कभी ख़ुदा,

    सबके नज़र में बनके वो शैतान रह गया॥


    बल्बों की रौशनी में भी खिलने लगे कंवल,

    “सूरज” तमाशा देख के हैरान रह गया॥


    डॉ. सूर्या बाली “सूरज”

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  • डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

    उड़ने लगे गुलाल तो समझो होली है। फागुन करे धमाल तो समझो होली है॥

    काले गोरे में कोई भेद न रह जाये, सतरंगी हो हाल तो समझो होली है॥

    बजने लगे मृदंग ढ़ोल जब नाचे सब, देकर के करताल तो समझो होली है॥

    मौसम के संग भांग अगर सर चढ़ जाये, सम्हले न जब चाल तो समझो होली है॥

    चलते फिरते राह कोई अंजाना भी, तुझपे दे रंग डाल तो समझो होली है॥

    दुश्मन को भी गले लगा ले जब बढ़के, दिल के मिटें मलाल तो समझो होली है॥

    रंगों की बौछार अबीरों के छींटे, तन मन कर दें लाल तो समझो होली है॥

    मन के गहरे सागर में जब भी लहरें, लेने लगें उछाल तो समझो होली है॥

    हर नुक्कड़ चौराहे पे जब पी करके, बुड्ढे करें बवाल तो समझो होली है॥

    नफ़रत मिटे मोहब्बत फैले जब “सूरज” दुनिया हो खुशहाल तो समझो होली है॥

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  • डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

    दिल से नफ़रत को हटाकर देखो।

    थाल पूजा के सजाकर देखो॥


    आ गई नूर भरी दिवाली,

    दीप खुशियों के जलाकर देखो॥


    जश्न है, शोर है पटाखों का,

    फूलझड़ियों को छुड़ाकर देखो॥


    खूबसूरत लगेगी ये दुनिया,

    तीरगी दिल की मिटाकर देखो॥


    दो कदम बढ़ के भरो बाहों मे,

    ज़िद की दीवार गिराकर देखो॥


    साथ था कारवां कभी मेरे,

    अब मैं तन्हा हूँ ये आकर देखो॥


    फूल ही फूल नज़र आएंगे,

    राह से खार हटाकर देखो॥


    दिल को आराम मिलेगा तेरे,

    रोते बच्चे को हँसाकर देखो॥


    होके मदहोश सभी झूमेंगे,

    जाम नज़रों से पिलाकर देखो॥


    ये जहां साथ गुनगुनाएगा,

    तुम ग़ज़ल मेरी तो गाकर देखो॥


    दौड़ा “सूरज” भी चला आएगा,

    दिल से इकबार बुलाकर देखो॥


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