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  • Shishirmit

    'एक काव्य मोती' वीर रस के सिद्ध राजस्थानी कवि श्री श्यामनारायण पाण्डेय के प्रसिद्ध खंडकाव्य 'जय हनुमान' से 'एक काव्य मोती'

    ज्वलल्ललाट पर अदम्य तेज वर्तमान था

    प्रचंड मान-भंग-जन्य क्रोध वर्धमान था

    ज्वलंत पुच्छ-बाहु व्योम में उछालते हुए

    अराति पर असह्य अग्नि-दृष्टि डालते हुए

    उठे कि दिग-दिगंत में अवर्ण्य ज्योति छा गयी

    कपीश के शरीर में प्रभा स्वयं समा गयी.

    - श्यामनारायण पाण्डेय (जय हनुमान)

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