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Sudheermaurya

aka सुधीर मौर्य

  • I live in मुंबई
  • I was born on नवंबर १
  • My occupation is लेखक, कवि, अभियंता
  • I am पुरुष
  • Sudheermaurya

    वो हिन्दू थे।


    उन्होंने विपत्ति को

    आभूषण की तरह

    धारण किया

    उनके ही घरों में आये

    लोगों ने

    उन्हें काफ़िर कहा

    क्योंकि

    वो हिन्दू थे।


    उन्होंने

    यूनान से आये घोड़ो का

    अभिमान

    चूर - चूर

    कर दिया

    सभ्यता ने

    जिनकी वजह से

    संसार में जन्म लिया

    वो हिन्दू थे।


    जिन्होंने

    तराइन के मैदान में

    हंस - हंस के

    हारे हुए

    दुश्मनों को

    जीवन दिया

    वो हिन्दू थे।


    जिनके मंदिर

    आये हुए लुटेरो ने

    तोड़ दिए

    जिनकी फूल जैसी

    कुमारियों को

    जबरन अगुआ करके

    हरम में रखा गया

    जिन पर

    उनके ही घर में

    उनकी ही भगवान्

    की पूजा पर

    जजिया लगया गया

    वो हिन्दू थे।


    हा वो

    हिन्दू थे

    जो हल्दी घाटी में

    देश की आन

    के लिए

    अपना रक्त

    बहाते रहे

    जिनके बच्चे

    घास की रोटी

    खा कर

    खुश रहे

    क्योंकि

    वो हिन्दू थे।


    हाँ वो हिन्दू हैं

    इसलिए

    उनकी लडकियों की

    अस्मत का

    कोई मोल नहीं

    आज भी

    वो अपनी ज़मीन

    पर ही रहते हैं

    पर अब

    उस ज़मीन का

    नाम पकिस्तान है।


    अब उनकी

    मातृभूमि का नाम

    पाकिस्तान है

    इसलिए

    अब उन्…









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    पीड़ा...

    वो बिस्तर पर बार-बार करवटें लेती है, सोने का प्रयत्न करती है किन्तु असफल होती है। उसकी आंखों में नींद नहीं है, नींद की जगह तो उसके चेहरे ने ले ली है, खुली आंखों से वो उसके ख्वाब देख रही है, आंखे बन्द करती है तो लगता है बिस्तर पे वो अकेली नहीं साथ में वो भी लेटा है, उसके बदन को सहलाते हुए और वो उसकी बाहों में पिघलती जा रही है। वो झट से आंखे खोल देती है, इधर-उधर नीम अंधेरे में नजर गड़ाती है, वो दिखाई नहीं देता है।

    उसी का सहपाठी है, विदेश एम.ए. हिन्दी साहित्य, दोनों के सेम सबजेक्ट, सेम सेक्शन। पूरी यूनिवर्सटी में उसकी शायरी और कविता के चर्चे हैं, तमाम लड़कियां उस पर मरती है। पर वो उस पर मरता है। हां वो दोनों दोस्त है, पर वो उससे दोस्ती से कुछ ज्यादा मांगता है। आज उसकी किताब में, एक पर्ची मिली थी, कुछ पक्तियां लिखी थी शायद कविता थी- सीम…

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